दुल्लापुर बाजार में गन्ने के खेत में भीषण आग, लाखों रुपये की फसल जलकर खाक, किसान पर टूटा मुसीबतों का पहाड़
पंडरिया की दमकल गाड़ी खराब, कवर्धा से मदद पहुंचने तक जल चुकी थी गन्ने की फसल, अग्निशमन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
शासन-प्रशासन मस्त, किसान त्रस्त! आखिर किसानों की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?
पंडरिया/दुल्लापुर बाजार 23//10/2026// जिला कबीरधाम। पंडरिया विकासखंड के अंतर्गत ग्राम दुल्लापुर बाजार में गन्ने की खड़ी फसल में अचानक आग लगने से एक किसान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। ग्राम दुल्लापुर बाजार निवासी किसान भारत उर्फ चटनी साहू के खेत में लगभग शाम 4 बजे अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और खेत में खड़ी लाखों रुपये की गन्ने की फसल आग की चपेट में आ गई। इस घटना से किसान के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि आग लगने के बाद तत्काल अग्निशमन सहायता नहीं मिल सकी। जानकारी के अनुसार पंडरिया की दमकल गाड़ी खराब होने के कारण कवर्धा से दमकल वाहन बुलाना पड़ा। लेकिन जब तक दमकल वाहन पहुंचता, तब तक गन्ने की फसल का बड़ा हिस्सा जलकर राख हो चुका था।पंडरिया में दमकल गाड़ी खराब, किसान की मेहनत पर फिरा पानीइस घटना ने क्षेत्र की अग्निशमन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंडरिया जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में दमकल वाहन का खराब होना चिंता का विषय है। यहां बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं। ऐसी स्थिति में खेतों में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए तत्काल अग्निशमन सुविधा उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।सवाल यह उठता है कि जब पंडरिया में दमकल वाहन खराब था, तो उसकी मरम्मत समय रहते क्यों नहीं कराई गई? आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं रखी गई? क्या किसानों की मेहनत और उनकी लाखों रुपये की फसल की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?पलभर में राख हुई किसान की मेहनत और उम्मीदेंगन्ने की खेती में किसानों को लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है। खेत की तैयारी, बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और फसल की देखभाल में बड़ी धनराशि खर्च होती है। किसान महीनों तक मेहनत करके फसल तैयार करता है और उसी फसल से परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने की उम्मीद रखता है।लेकिन किसान भरत उर्फ चटनी साहू के खेत में लगी अचानक आग ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। लाखों रुपये की गन्ने की फसल जल जाने से उन्हें भारी आर्थिक क्षति पहुंचने की आशंका है। वास्तविक नुकसान का आकलन राजस्व एवं कृषि विभाग के सर्वेक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।यह घटना केवल एक किसान की फसल जलने की नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है।शासन-प्रशासन मस्त, किसान त्रस्त — जवाबदेही आखिर किसकी?एक ओर शासन द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर आग जैसी आपातकालीन घटनाओं में समय पर सहायता उपलब्ध नहीं होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।पंडरिया क्षेत्र में गन्ने की खेती किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में अग्निशमन व्यवस्था का सुचारु रहना बेहद जरूरी है। यदि स्थानीय स्तर पर दमकल वाहन उपलब्ध होने के बावजूद खराब स्थिति में रहे, तो आपातकाल के समय किसानों की फसल और संपत्ति की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर दमकल गाड़ी खराब होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को कब से थी? उसकी मरम्मत के लिए क्या कदम उठाए गए? और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी?इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।किसान को तत्काल मुआवजा देने और नुकसान का सर्वे कराने की आवश्यकताआग से प्रभावित किसान भरत उर्फ चटनी साहू को राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है। राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर जली हुई गन्ने की फसल का निष्पक्ष सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।नुकसान का वास्तविक आकलन कर किसान को पात्रता और लागू शासकीय प्रावधानों के अनुसार उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि प्रभावित किसान को कुछ राहत मिल सके।इसके साथ ही आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच भी आवश्यक है। फिलहाल आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं है।क्या बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा प्रशासन?दुल्लापुर बाजार की यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते अग्निशमन व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं से अन्य किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन किसान की जली हुई फसल का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाएगा? क्या पंडरिया की खराब दमकल गाड़ी को तत्काल दुरुस्त किया जाएगा? या फिर किसानों को अपनी मेहनत की कमाई इसी तरह आग की भेंट चढ़ते देखना पड़ेगा?फिलहाल दुल्लापुर बाजार की इस घटना ने एक बार फिर किसानों की सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।लोक सेवक मिररप्रधान सम्पादक – दिगवेंद्र कुमार गुप्ता की रिपोर्टजिला कबीरधाम, छत्तीसगढ़