कवर्धा पंडरिया - श्रमिकों के साथ मनमानी बर्दाश्त नहीं, : श्रमिकों के साथ मनमानी बर्दाश्त नहीं, 31 श्रमिकों को बाहर करने और 3 श्रमिकों को वापस नहीं लेने के निर्णय से आक्रोश
Chief Editor-Digvendra Kumar Gupta / Fri, Sep 4, 2026 / Post views : 154
प्रेस विज्ञप्ति
श्रमिकों के साथ मनमानी बर्दाश्त नहीं, 31 श्रमिकों को बाहर करने और 3 श्रमिकों को वापस नहीं लेने के निर्णय से आक्रोश
पंडरिया। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया में श्रमिकों के साथ किए जा रहे कथित मनमाने व्यवहार को लेकर भारतीय मजदूर संघ में भारी आक्रोश है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि श्रमिकों के साथ अन्याय और भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मामले की शुरुआत 5 अगस्त को हुई, जब इकाई महामंत्री द्वारा कारखाना प्रबंधन के समक्ष श्रमिकों के 7 माह के लंबित भुगतान तथा पिछले आंदोलन में हुए समझौते को लागू नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया। संगठन के अनुसार इस पर एमडी द्वारा इकाई महामंत्री से “नेतागिरी करते हो” कहकर उनकी आईडी डिलीट कर उन्हें काम से बाहर कर दिया गया।
इसके विरोध में 11 अगस्त से “ललित चन्द्रवंशी को काम पर वापस लो” की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन एवं टूल डाउन आंदोलन शुरू किया गया। लगातार आंदोलन के बाद 21 अगस्त को समझौता हुआ, जिसमें ललित चन्द्रवंशी को वापस काम पर लेने की बात स्वीकार की गई और उन्हें काम पर वापस लिया गया।
लेकिन संगठन के अनुसार इसके अगले ही दिन 31 श्रमिकों को काम से बाहर कर दिया गया, जबकि ये श्रमिक पिछले लगभग 9 वर्षों से लगातार कारखाने में कार्य करते आ रहे थे और इनका ज्वाइनिंग भी हो चुका था। इसके बावजूद उन्हें काम से बाहर करने का निर्णय श्रमिकों के लिए गंभीर चिंता और आक्रोश का विषय है।
इसके बाद रविवार रात कारखाना प्रबंधन की ओर से कहा गया कि 31 में से 28 श्रमिकों को काम पर रखा जाएगा, लेकिन 3 श्रमिकों को काम पर वापस नहीं लिया जाएगा। संगठन के अनुसार इन तीनों श्रमिकों को काम पर आने से पहले यह भी कहा गया था कि “काम पर लगने के बाद हड़ताल में शामिल नहीं होना है, तभी काम पर आना।” इसके बावजूद अब हड़ताल में शामिल होने को आधार बनाकर इन तीनों श्रमिकों को काम पर वापस नहीं लेने की बात कही जा रही है।
भारतीय मजदूर संघ ने सवाल उठाया है कि यदि 31 श्रमिकों का ज्वाइनिंग हो चुका था और वे वर्षों से लगातार कार्य करते आ रहे थे, तो अगले ही दिन उन्हें बाहर करने का आधार क्या है? और यदि 28 श्रमिकों को वापस लिया जा सकता है, तो उन्हीं परिस्थितियों में बाकी 3 श्रमिकों के साथ अलग व्यवहार क्यों?
संगठन ने कहा कि यह केवल तीन श्रमिकों का मामला नहीं है। आज तीन लोगों के साथ मनमानी होगी, तो कल किसी भी श्रमिक की आईडी बंद की जा सकती है। संगठन श्रमिकों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव और दबाव स्वीकार नहीं करेगा।
भारतीय मजदूर संघ ने एमडी एवं कारखाना प्रबंधन से मांग की है कि तीनों श्रमिकों को भी तत्काल काम पर वापस लिया जाए और 31 श्रमिकों को बाहर किए जाने के पूरे मामले पर पुनर्विचार किया जाए। संगठन का कहना है कि प्रबंधन को टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत और न्यायपूर्ण समाधान का रास्ता अपनाना चाहिए।
भारतीय मजदूर संघ का स्पष्ट संदेश है—श्रमिकों के अधिकारों के साथ मनमानी नहीं चलेगी। संगठन अपने सदस्यों के साथ खड़ा है और न्याय मिलने तक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेगा।
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