कवर्धा-कबीरधाम जिले में नहीं थम रही गौवंशी दुर्दशा, सड़क : बांधाटोला में अज्ञात वाहन ने गौवंश के झुंड को मारी टक्कर, छह की मौत, दो गंभीर घायल
Chief Editor-Digvendra Kumar Gupta / Sat, Sep 5, 2026 / Post views : 163
कबीरधाम जिले में नहीं थम रही गौवंशी दुर्दशा, सड़कों पर बेसहारा गौवंश
बांधाटोला में अज्ञात वाहन ने गौवंश के झुंड को मारी टक्कर, छह की मौत, दो गंभीर घायल
कवर्धा। 05/09/2026// कबीरधाम जिले में जिस ढंग से मौजूदा सरकार के शासनकाल में गौवंश की दुर्दशा देखने को मिल रही है उससे साफ जाहिर है कि गौमाता राजनैतिक दलों के लिए सिर्फ एक राजनैतिक मुद्दा से ज्यादा कुछ नहीं है। यहीं वजह है कि जिले में गौवंश की दुर्दशा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सड़कों पर निराश्रित घूम रहे गौवंश आए दिन सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। बुधवार सुबह बोड़ला थाना क्षेत्र के ग्राम बांधाटोला के पास नेशनल हाईवे-30 पर एक अज्ञात वाहन ने गौवंश के झुंड को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में करीब आधा दर्जन गौवंश की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। बताया गया कि बुधवार सुबह करीब 7 बजे बांधाटोला के पास गौवंश का झुंड नेशनल हाईवे-30 पर मौजूद था। इसी दौरान तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने झुंड को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि छह गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दो गौवंश गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर कुछ स्थानीय गौ रक्षक मौके पर पहुंचे और विरोध जताते हुए कुछ समय के लिए नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। हालांकि बाद में चक्काजाम समाप्त कर दिया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद बोड़ला पुलिस मौके पर पहुंची। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस द्वारा दुर्घटना को अंजाम देने वाले वाहन और उसके चालक की तलाश की जा रही है।
लगातार हो रही गौवंश की मौत
यहां बताना लाजिमी होगा कि जिले में बारिश के इस सीजन में कोई और बेहतर ठिकाना नहीं होने के कारण ज्यादातर निराश्रित मवेशियों का जमावड़ा सड़कों पर होता है, जो इन मवेशियों के साथ वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक है। सड़कों पर मवेशियों के भारी जमावड़े के कारण आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, जिसमें कभी वाहन चालक अपनी जान गंवा रहे हैं तो कभी मवेशी। अभी बीते 23 सितम्बर को ही नेशनल हाईवे-30 में स्थित रानीसागर के पास पांच गौवंश की मौत सड़क हादसे में हुई थी।
सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं
प्रदेश की सत्ता परिवर्तन को करीब तीन साल होने को जा रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि इन करीब तीन वर्षों में भी प्रदेश सरकार गौवंश के संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन की दिशा में कोई रोडमैप तैयार नहीं कर पाई है। आज भी यह समस्या कबीरधाम के गांव, शहर से लेकर पूरे प्रदेश में कायम है।
शासन-प्रशासन की हवा-हवाई बातें
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और कवर्धा विधायक ने जिले में एक गौ अभ्यारण्य निर्माण की बात कही थी, लेकिन आज तलक इस गौ अभ्यारण्य का अता-पता नहीं है। अभी पिछले दिनों तत्कालीन कलेक्टर गोपाल वर्मा ने अपने स्थानांतरण से पूर्व जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में इस बात के सख्त निर्देश दिए थे कि जिले की सड़कों पर मवेशी नहीं दिखने चाहिए। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसा होगा कैसे। बुधवार को नवपदस्थ कलेक्टर लुतिका प्रजापति ने भी सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों की एक बैठक ली, लेकिन इस बैठक में भी सड़क दुर्घटनाओं के तमाम कारणों में से एक प्रमुख कारण सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी को हटाने का कोई रोडमैप नहीं बताया गया।
ठोस पहल व कार्ययोजना की जरूरत
ऐसा नहीं है कि निराश्रित गौवंश को संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन देना कोई नामुमकिन कार्य है, लेकिन इसके लिए शासन-प्रशासन में इच्छाशक्ति होना आवश्यक है। इस दिशा में ऐसे मौकापरस्त पशुपालकों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए, जो अपने मवेशियों को घरों में नहीं रख रहे हैं। गांवों की गौचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए। हर जिले में गौ अभ्यारण्य का निर्माण किया जा सकता है। इसके अलावा पूर्व शासनकाल में संचालित गौठान योजना पर भी पूर्ण पारदर्शिता और आवश्यक सुधारों के साथ विचार किया जा सकता है।
लाइव अपडेट
कबीरधाम जिले में नहीं थम रही गौवंशी दुर्दशा, सड़कों पर बेसहारा गौवंश बांधाटोला में अज्ञात वाहन ने गौवंश के झुंड को मारी टक्कर, छह की मौत, दो गंभीर घायल
लगातार हो रही गौवंश की मौत
यहां बताना लाजिमी होगा कि जिले में बारिश के इस सीजन में कोई और बेहतर ठिकाना नहीं होने के कारण ज्यादातर निराश्रित मवेशियों का जमावड़ा सड़कों पर होता है, जो इन मवेशियों के साथ वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक है। सड़कों पर मवेशियों के भारी जमावड़े के कारण आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, जिसमें कभी वाहन चालक अपनी जान गंवा रहे हैं तो कभी मवेशी। अभी बीते 23 सितम्बर को ही नेशनल हाईवे-30 में स्थित रानीसागर के पास पांच गौवंश की मौत सड़क हादसे में हुई थी।
सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं
प्रदेश की सत्ता परिवर्तन को करीब तीन साल होने को जा रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि इन करीब तीन वर्षों में भी प्रदेश सरकार गौवंश के संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन की दिशा में कोई रोडमैप तैयार नहीं कर पाई है। आज भी यह समस्या कबीरधाम के गांव, शहर से लेकर पूरे प्रदेश में कायम है।
शासन-प्रशासन की हवा-हवाई बातें
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और कवर्धा विधायक ने जिले में एक गौ अभ्यारण्य निर्माण की बात कही थी, लेकिन आज तलक इस गौ अभ्यारण्य का अता-पता नहीं है। अभी पिछले दिनों तत्कालीन कलेक्टर गोपाल वर्मा ने अपने स्थानांतरण से पूर्व जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में इस बात के सख्त निर्देश दिए थे कि जिले की सड़कों पर मवेशी नहीं दिखने चाहिए। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसा होगा कैसे। बुधवार को नवपदस्थ कलेक्टर लुतिका प्रजापति ने भी सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों की एक बैठक ली, लेकिन इस बैठक में भी सड़क दुर्घटनाओं के तमाम कारणों में से एक प्रमुख कारण सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी को हटाने का कोई रोडमैप नहीं बताया गया।
ठोस पहल व कार्ययोजना की जरूरत
ऐसा नहीं है कि निराश्रित गौवंश को संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन देना कोई नामुमकिन कार्य है, लेकिन इसके लिए शासन-प्रशासन में इच्छाशक्ति होना आवश्यक है। इस दिशा में ऐसे मौकापरस्त पशुपालकों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए, जो अपने मवेशियों को घरों में नहीं रख रहे हैं। गांवों की गौचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए। हर जिले में गौ अभ्यारण्य का निर्माण किया जा सकता है। इसके अलावा पूर्व शासनकाल में संचालित गौठान योजना पर भी पूर्ण पारदर्शिता और आवश्यक सुधारों के साथ विचार किया जा सकता है।
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