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देश-छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS) (अ. भा. किसान सभा - AIKS : कोरबा के भूविस्थापितों की आवाज संसद में उठाई जाएगी, मांगें जायज : अमराराम

Chief Editor-Digvendra Kumar Gupta

Chief Editor-Digvendra Kumar Gupta / Mon, Jun 15, 2026 / Post views : 407

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समाचार

छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS)

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(अ. भा. किसान सभा - AIKS से संबद्ध)

जिला समिति कोरबा, छत्तीसगढ़

प्रेस विज्ञप्ति : 15.06.2026

कोरबा के भूविस्थापितों की आवाज संसद में उठाई जाएगी, मांगें जायज : अमराराम

कोरबा। कोरबा जिले के भू-विस्थापितों की मांगों को जायज ठहराते हुए माकपा के सांसद, अखिल भारतीय किसान सभा के उपाध्यक्ष और पार्टी केे पोलिट ब्यूरो के सदस्य अमराराम ने उनकी आवाज को संसद में उठाने का आश्वासन दिया। महाराष्ट्र और राजस्थान के आदिवासियों और किसानों के आंदोलनों, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और तीन किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ चले देशव्यापी आंदोलन के अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की व्यापक एकता और सड़कों पर उनका जुझारू आंदोलन ही भाजपा सरकार को भू-विस्थापितों की मांगों को पूरा करने को बाध्य करेगा, अन्यथा तो उन्हें अडानी-अंबानी जैसे कॉरपोरेटों की सेवा करने से ही फुर्सत नहीं मिलती।

माकपा सांसद अमराराम ने यहां छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ द्वारा आयोजित एक आमसभा को संबोधित किया, जिसके बाद भूविस्थापितों ने रैली निकालकर जिलाधीश कार्यालय का घेराव किया तथा उनके नेतृत्व में जिलाधीश को मांग पत्र सौंपा।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश में भाजपा सरकार मां के नाम पर एक पेड़ लगाने का नाटक कर रही है, लेकिन दूसरी ओर बस्तर, सरगुजा और हसदेव के जंगलों को कॉरपोरेटों को सौंप रही है। यह सरकार गरीबों से उनकी भूमि और आजीविका छीन रही है और भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावितों को रोजगार और मानवीय पुनर्वास तक देने को तैयार नहीं है। मुआवजा देने के नाम पर भी भारी भेदभाव किया जा रहा है। पिछले 40 साल से भूविस्थापित अपने रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस पीड़ा को संसद में उठाया जाएगा और मोदी सरकार और कोल इंडिया की जवाबदेही तय की जाएगी।

सभा को किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव अवधेश कुमार तथा आदिवासी एकता महासभा के बाल सिंह तथा किसान सभा नेता प्रशांत झा ने भी संबोधित किया। सभा के बाद रैली निकली और जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में छोटे खातेदारों को रोजगार देने, भूविस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण, पूर्व में अधिग्रहित जमीन की वापसी, पट्टा, आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाने, पेयजल की व्यवस्था करने, बसावट एवं खनन प्रभावित गांवों की अन्य समस्याओं का ज़िक्र किया गया है। रैली और घेराव में हसदेव, सरगुजा संभाग, रायगढ़, बांगो बांध से प्रभावित किसान भी शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कपिल देव, दीपक साहू, दामोदर श्याम, रेशम यादव, कौशल्या, फिरतू बिंझवार, दिलहरण सारथी, रामलाल करियारे, बलराम यादव, शिवरतन कंवर, सोनम साहू, रमेश दास, मनोज विश्वकर्मा, घासी के साथ बड़ी संख्या में प्रभावित क्षेत्र के भू विस्थापित उपस्थित थे।

विस्थापितों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं :

1) एसईसीएल द्वारा आज तक अधिग्रहीत भूमि पर, वन टाइम सेटलमेंट कर, सभी लंबित रोजगार प्रकरणों का छह माह के भीतर निराकरण करके प्रभावितों को स्थायी रोजगार दिया जाएं।

2) आज तक के अधिग्रहणों के सभी प्रकरणों में और भविष्य में होने वाले अधिग्रहण में, प्रभावित सभी छोटे खातेदारों (2 एकड़ से कम भूमि वाले) को अनिवार्य रूप से स्थायी रोजगार दिया जाएं।

3) भू-अर्जन के बाद विस्थापित परिवारों में जन्म लेने वाले बच्चों के रोजगार के दावे स्वीकार करके उन्हें स्थायी रोजगार दिया जाएं।

4) अलग-अलग खातों के संयोजन के कारण रोजगार से वंचित लोगों को चिह्नित करके और उनके दावे स्वीकार करके उन्हें स्थायी रोजगार प्रदान किया जाये। आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए।

5) कोयला खनन की समाप्ति के बाद पुराने अर्जित भूमि को सुधारकर मूल खातेदारों को वापस किया जाएं।

6) अधिग्रहण के बाद 5 सालों के भीतर जिन जमीनों पर कोल इंडिया ने भौतिक कब्जा नहीं किया है और जिन अधिग्रहित जमीनों पर किसान ही पीढ़ियों से काबिज हैं, ऐसी जमीन मूल भूस्वामी किसान या उसके उत्तराधिकारी को हस्तांतरित की जाएं तथा ऐसी जमीनों का भूस्वामित्व उन्हें प्रदान किया जाएं।

7) अधिग्रहण से प्रभावित भू-विस्थापित किसानों के लिए उनकी सहमति के साथ पुनर्वास स्थल का चयन किया जाएं तथा बुनियादी मानवीय सुविधाओं की उपलब्धता के साथ उनका पुनर्वास किया जाएं। इन स्थलों/ गांवों में पुनर्वासित परिवारों को उनके कब्जे की भूमि के पट्टे दिए जाएं।

8) खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था किया जाए।

9) खनन प्रभावित गांवों एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।

10) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू-विस्थापितों एवं खनन प्रभावित गांवों के 100% बेरोजगारों को100% रोजगार दिया जाएं। इसके बाद ही अन्य लोगों को रोजगार दिया जाएं।

11) भूमि अधिग्रहण से प्रभावित ऐसे भू-विस्थापित, जिन्हें बसावट नहीं दिया गया है, उन्हें बसावट प्रदान किया जाए। बसावट के नाम पर भेदभाव बंद किया जाए और सभी क्षेत्रों के भू-विस्थापितों को बसावट के लिए एक समान राशि 15 लाख रुपए दिए जाए।

12) डंपिंग की मिट्टी को खोदे गए खदान में वापस भरा जाए। इस मिट्टी का किसी दूसरे कार्यों में प्रयोग ना किया जाए।

13) एसईसीएल कुसमुंडा द्वारा वर्ष 2018 में गेवरा में अधिग्रहीत भूमि के लिए किसानों को तत्काल नवीनतम दरों पर मुआवजा और स्थायी रोजगार आदि दिया जाए ; अन्यथा पूर्व में जारी अधिग्रहण रद्द किया जाए।

14) डी-पिल्लरिंग से प्रभावित गांव सुराकछार बस्ती में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।

15) शासन की योजनाओं से प्राप्त पट्टों एवं शासकीय और वन भूमि पर बने मकानों का भी मुआवजा एवं सौ प्रतिशत सोलिशियम राशि दी जाएं और बसाहट के सभी लाभ उन्हें दिया जाये ।

16) बांगों बांध जलाशय में ठेका प्रणाली समाप्त किया जाएं और विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मछुवारा समितियों को मछली पकड़ने का अधिकार दिया जाए।

17) जिले की विभिन्न सहकारी समितियों में खाद की भयानक कमी है। शासन ने प्रति किसान खाद की जो मात्रा निर्धारित की है, वह प्रति एकड़ कृषि की जरूरत का केवल आधा ही है। इससे फसल उत्पादन प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा। किसानों पर जैविक और नैनो खाद लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है। अतः निर्धारित खाद की दुगुनी मात्रा किसानों को उपलब्ध कराया जाएं, ताकि खेती-किसानी को बचाया जा सके।

जारीकर्ता : दीपक साहू, प्रशांत झा, छत्तीसगढ़ किसान सभा

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श्री दिगवेन्द्र कुमार गुप्ता

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