छिरबांधा के जर्जर स्कूल पर बड़ा सवाल: छत से झड़ रहा प्लास्टर, मासूमों की जिंदगी खतरे में!
कब टूटकर गिर पड़े छत का कमजोर हिस्सा, कोई भरोसा नहीं; हादसे का इंतजार कर रहा शिक्षा विभाग बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे, जिम्मेदारों से तत्काल मरम्मत की मांग
कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत छिरबांधा के प्राथमिक विद्यालय की जर्जर हालत बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिस स्कूल में नन्हे-मुन्ने बच्चे अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुनने आते हैं, उसी स्कूल की छत से प्लास्टर उखड़ने और कमजोर हिस्सों के टूटने की स्थिति ने खतरे की आशंका बढ़ा दी है। ऐसे हालात में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी चिंता गहराने लगी है।
छत जर्जर, खतरा बरकरार—आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार
स्कूल भवन की स्थिति देखकर यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मासूम बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक माहौल कब मिलेगा प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे भवन की मजबूती और खतरे का आकलन नहीं कर सकते। वे शिक्षक के निर्देश पर कक्षा में बैठकर पढ़ाई करते हैं। ऐसे में यदि छत का कमजोर हिस्सा अचानक टूटकर गिर जाए, तो गंभीर हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन छिरबांधा के प्राथमिक स्कूल की जर्जर स्थिति व्यवस्था की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रही है। आखिर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं l
क्या किसी बड़े हादसे के बाद खुलेगी जिम्मेदारों की आंखें
स्कूल भवन की स्थिति को लेकर अब शिक्षा विभाग, संबंधित ग्राम पंचायत और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। भवन की वास्तविक स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कराना, कमजोर हिस्सों की पहचान करना और तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करना जरूरी है। यदि भवन का कोई हिस्सा असुरक्षित है, तो उसकी मरम्मत होने तक बच्चों को वहां बैठाने के बजाय सुरक्षित वैकल्पिक कक्ष में पढ़ाई की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सवाल यह भी है कि संबंधित अधिकारियों ने भवन की स्थिति का निरीक्षण किया है या नहीं। यदि निरीक्षण किया गया है, तो मरम्मत और सुरक्षा को लेकर क्या कार्रवाई हुई, इन सवालों पर जिम्मेदार विभागों को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
मरम्मत में देरी नहीं, बच्चों की सुरक्षा पर हो तत्काल फैसला
ग्राम पंचायत छिरबांधा के प्राथमिक विद्यालय की स्थिति को देखते हुए अब केवल आश्वासन या औपचारिक निरीक्षण पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत है तत्काल स्थल निरीक्षण, तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत की। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी बच्चे को असुरक्षित भवन में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदार विभाग संभावित हादसे को रोकने के लिए पहले कार्रवाई करेंगे, या फिर किसी अनहोनी के बाद ही व्यवस्था जागेगी, मासूमों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि बच्चों की जिंदगी किसी भी लापरवाही से कहीं अधिक अनमोल है।