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सुनेत्रा के सपने पर कांग्रेस का अड़ंगा : राजनीति की बड़ी खिलाड़ी निकलीं सुनेत्रा पवार, चल दी ससुर शरद पवार वाली चाल

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महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने महज दो महीने के अंदर ही साबित कर दिया कि वे सिर्फ अजित पवार की पत्नी नहीं, बल्कि एक कुशल और दूरदर्शी राजनीतिज्ञ भी हैं. पति अजित पवार के 28 जनवरी को प्लेन क्रैश में निधन के बाद बारामती सीट खाली हो गई थी. अब 23 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में इस पारंपरिक गढ़ को बचाने के लिए सुनेत्रा पवार ने ठीक वैसी ही चतुर चाल चली है, जैसी उनके ससुर शरद पवार दशकों से खेलते आए हैं.

सुनेत्रा पवार ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को फोन कर बारामती उपचुनाव में समर्थन मांगा है. उन्होंने सीधे उद्धव ठाकरे से अपील की कि बारामती में उनका उम्मीदवार खड़ा न किया जाए, ताकि चुनाव बिना मुकाबले हो सके. शिवसेना (UBT) के सचिव मिलिंद नार्वेकर और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस फोन कॉल की पुष्टि की है.

सुनेत्रा के सपने पर कांग्रेस का अड़ंगा!

संजय राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे जल्द ही इस पर अपना रुख साफ करेंगे. बताया जा रहा है कि ठाकरे और पवार परिवार के बीच पुराने रिश्तों को देखते हुए समर्थन की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.

यह कदम सुनेत्रा पवार की सियासी समझदारी को रेखांकित करता है. वहीं इस उपचुनाव को लेकर विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के अंदर दरार साफ दिख रही है. शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (एसपी) ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह बारामती में उम्मीदवार नहीं उतारेगी, लेकिन कांग्रेस ने इस सीट पर दावा ठोक दिया है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल ने पिछले सप्ताह कहा था कि पार्टी हाईकमान की मंजूरी से बारामती में चुनाव लड़ेगी और कई उम्मीदवारों के साथ इंटरव्यू भी किए जा चुके हैं.

कितनी कामयाब होगी ससुर शरद वाली चाल

ऐसे में सुनेत्रा पवार ने शरद पवार की क्लासिक रणनीति अपनाई… विरोधी खेमे के अंदर फूट डालना और भावनात्मक दबाव बनाना. उन्होंने उद्धव ठाकरे से सीधा संपर्क साधा, क्योंकि अजित पवार और उद्धव ठाकरे के बीच गहरा व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्ता रहा है. संजय राउत ने खुद स्वीकार किया कि ‘उद्धव जी और अजित पवार के बीच भावनात्मक बंधन था’. इस बंधन का फायदा उठाते हुए सुनेत्रा पवार MVA के अंदर कांग्रेस को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही हैं.

एनसीपी के वरिष्ठ नेता और सांसद सुनील तटकरे ने सभी दलों से अपील की है कि बारामती उपचुनाव बिना मुकाबले संपन्न हो. उन्होंने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद बारामती के लोग बेहद भावुक स्थिति में हैं. तटकरे ने शनिवार को जारी बयान में कहा, ‘यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि अपने नेता और सहयोगी के प्रति हम सबकी जिम्मेदारी है. ऐसा करना राज्य की राजनीतिक संस्कृति को भी मजबूत करेगा.’

पवार परिवार का गढ़ है बारामती

बारामती पवार परिवार का गढ़ रहा है. अजित पवार आठ बार यहां से विधायक चुने गए थे. 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारी अंतर से जीत हासिल की थी. वहीं 2024 के चुनाव में अपने भतीजे युगेंद्र पवार को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. अजित पवार की मौत के बाद यह सीट सुनेत्रा पवार के लिए भावनात्मक और राजनीतिक दोनों मायनों में महत्वपूर्ण है. अगर वे यहां से जीत जाती हैं, तो न सिर्फ पति की विरासत संभाल लेंगी, बल्कि एनसीपी अध्यक्ष के रूप में अपनी पकड़ भी मजबूत कर लेंगी.

सुनेत्रा पवार 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुकी हैं और बाद में NCP की अध्यक्ष भी बनाई गईं. अब 6 अप्रैल को इस उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने वाली हैं. उनकी रणनीति साफ है एमवीए के सहयोगी दलों को भावनात्मक दबाव में रखकर कांग्रेस को अकेला छोड़ देना. अगर शिवसेना (UBT) ने समर्थन दे दिया तो कांग्रेस के लिए बारामती में चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाएगा.

सीएम फडणवीस की भी अपील

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सभी दलों से अपील की है कि वे सुनेत्रा पवार को समर्थन दें. उन्होंने कहा कि अतीत में भी कई मौकों पर ऐसे भावनात्मक परिस्थितियों में विपक्ष ने समर्थन दिया है.

बारामती उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है. यह सुनेत्रा पवार की राजनीतिक परीक्षा भी है. अगर वे बिना मुकाबले जीत जाती हैं, तो यह उनकी बड़ी जीत मानी जाएगी और पवार परिवार की विरासत पर उनका दावा और मजबूत हो जाएगा. वहीं अगर कांग्रेस अड़े रहती है और चुनाव लड़ती है, तो MVA में दरार और गहरी हो सकती है.

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