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कवर्धा न्यूज़ -मत्स्य पालन से बदली दुर्गेश्वरी निषाद की : बिहान योजना से शुरू किए गए व्यवसाय ने बनाया आत्मनिर्भर, बनीं “लखपति दीदी”

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मत्स्य पालन से बदली दुर्गेश्वरी निषाद की तकदीर

बिहान योजना से शुरू किए गए व्यवसाय ने बनाया आत्मनिर्भर, बनीं “लखपति दीदी”

कवर्धा 30 अप्रैल 2026। बिहान योजना से मिली सहायता और आत्मविश्वास के बल पर कबीरधाम जिले के ग्राम धरमपुरा निवासी श्रीमती दुर्गेश्वरी निषाद ने मत्स्य पालन को आजीविका का प्रमुख साधन बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है। लगभग 1.50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया गया उनका मत्स्य पालन व्यवसाय आज प्रतिवर्ष 2.50 लाख रुपये से अधिक आय दे रहा है। उनकी मेहनत और सफलता ने उन्हें “लखपति दीदी” के रूप में नई पहचान दिलाई है और क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाया है।

श्रीमती दुर्गेश्वरी निषाद का जीवन पहले आर्थिक कठिनाइयों से घिरा हुआ था। उनके पति सिलाई कार्य के माध्यम से सीमित आय अर्जित करते थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण बड़ी मुश्किल से हो पाता था। दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी उन्हें कई बार सोच-विचार करना पड़ता था। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दुर्गेश्वरी के मन में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की प्रबल इच्छा थी। इसी दौरान उन्होंने साहस और दृढ़ निश्चय के साथ स्व सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। बिहान योजना के माध्यम से उन्हें समूह से जुड़ने के बाद बैंक से ऋण सुविधा मिली। शासन के सहयोग और प्रशिक्षण ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी। प्राप्त ऋण राशि से उन्होंने मत्स्य पालन का कार्य प्रारंभ किया, जो उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

शुरुआत में लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये के निवेश से शुरू किया गया मत्स्य पालन आज उनके लिए स्थायी आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है। वर्तमान में वे प्रतिवर्ष 2 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही वे सिलाई कार्य एवं आटा चक्की संचालन जैसे अन्य आजीविका गतिविधियों से भी आय में वृद्धि कर रही हैं। उनके समूह की अन्य महिलाएँ भी विभिन्न गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। श्रीमती दुर्गेश्वरी निषाद आज “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनका यह सफर न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी है, बल्कि आत्मविश्वास, परिश्रम और संकल्प का जीवंत उदाहरण भी है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र की अन्य महिलाएँ भी बिहान योजना से जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं।

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