Thu, 29 Oct 2026 | 07:37:10 PM
ई-पेपर
Loksevak Mirror
Breaking News Exclusive
CG- किसानों के लिए जरूरी खबर: अब सोसायटियों में नहीं लगानी पड़ेगी लंबी लाइन, घर बैठे मिलेगा टोकन, जानें क्या हैं नियम….. 05 वर्षों में 7,395 करोड़ रूपए का प्रावधान, विकसित भारत/2047 के लक्ष्य को मिलेगी गति कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देश पर खाद्य विभाग एवं मंडी समिति की संयुक्त कार्रवाई, 5 प्रकरण दर्ज जिले के 113 केन्द्रों में की जाएगी धान की खरीदी नंदूराम अंचल ने जताया मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार जिले में गोवंशीय पशुओं के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला कलेक्टोरेट स्थित मनियारी सभा कक्ष में जिला स्तरीय गौधाम पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने किया ₹6.54 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन, वनांचल क्षेत्र के 872 छापेमारी में 610 आपराधिक प्रकरण दर्ज, 18.38 लाख रुपये से अधिक की सामग्री जब्त दुकान का ताला तोड़कर नगदी एवं किराना दुकान की अन्य सामग्री सहित कुल 60,000/- रुपये की संपत्ति की गई थी चोरी। श्रम कार्ड एवं आधार कार्ड की जानकारी में विषमता होने पर कराएं ई-केवाईसी कलेक्टोरेट परिसर स्थित सेवा सेतु केंद्र से मिली सुविधा CG- किसानों के लिए जरूरी खबर: अब सोसायटियों में नहीं लगानी पड़ेगी लंबी लाइन, घर बैठे मिलेगा टोकन, जानें क्या हैं नियम….. 05 वर्षों में 7,395 करोड़ रूपए का प्रावधान, विकसित भारत/2047 के लक्ष्य को मिलेगी गति कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देश पर खाद्य विभाग एवं मंडी समिति की संयुक्त कार्रवाई, 5 प्रकरण दर्ज जिले के 113 केन्द्रों में की जाएगी धान की खरीदी नंदूराम अंचल ने जताया मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार जिले में गोवंशीय पशुओं के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला कलेक्टोरेट स्थित मनियारी सभा कक्ष में जिला स्तरीय गौधाम पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने किया ₹6.54 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन, वनांचल क्षेत्र के 872 छापेमारी में 610 आपराधिक प्रकरण दर्ज, 18.38 लाख रुपये से अधिक की सामग्री जब्त दुकान का ताला तोड़कर नगदी एवं किराना दुकान की अन्य सामग्री सहित कुल 60,000/- रुपये की संपत्ति की गई थी चोरी। श्रम कार्ड एवं आधार कार्ड की जानकारी में विषमता होने पर कराएं ई-केवाईसी कलेक्टोरेट परिसर स्थित सेवा सेतु केंद्र से मिली सुविधा
लोक सेवक मिरर अखबार में जो दिखेगा वही छपेगा लोक सेवक मिरर में आपका स्वागत है क्षेत्रिय खबरों के प्रकाशन, समाचार विज्ञापन एवं सवांददाता बनने हेतु संपर्क करें | 👉प्रधान सम्पादक एडिटर - दिगवेन्द्र कुमार गुप्ता लोक सेवक मिरर अखबार में जो दिखेगा वही छपेगा लोक सेवक मिरर में आपका स्वागत है क्षेत्रिय खबरों के प्रकाशन, समाचार विज्ञापन एवं सवांददाता बनने हेतु संपर्क करें | 👉प्रधान सम्पादक एडिटर - दिगवेन्द्र कुमार गुप्ता लोक सेवक मिरर अखबार में जो दिखेगा वही छपेगा लोक सेवक मिरर में आपका स्वागत है क्षेत्रिय खबरों के प्रकाशन, समाचार विज्ञापन एवं सवांददाता बनने हेतु संपर्क करें | 👉प्रधान सम्पादक एडिटर - दिगवेन्द्र कुमार गुप्ता

देश-कपास किसानों की बर्बादी : किसकी उंगलियां घी में?! : कपास किसानों की बर्बादी : किसकी उंगलियां घी में?!

Chief Editor-Digvendra Kumar Gupta

Chief Editor-Digvendra Kumar Gupta / Thu, Jun 4, 2026 / Post views : 156

शेयर करें:

कपास किसानों की बर्बादी : किसकी उंगलियां घी में?!

Advertisement

(आलेख : संजय पराते)

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 32 लाख किसान कपास उत्पादन से जुड़े हुए हैं। वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा होगी। अधिकांश कपास उत्पादक किसान सीमांत और छोटे किसान ही हैं। हमारे देश में कपास के आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क लगता है। यह आयात शुल्क सस्ते कपास के अंधाधुंध आयात को रोकने और घरेलू कपास उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा करने का काम करता है। लेकिन आरएसएस-भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस साल जून से अक्टूबर तक के पांच महीनों के लिए इस आयात शुल्क को निलंबित करने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले से 40 लाख गांठ कपास (1 कपास गांठ = 170 किलो) के आयात की संभावना जताई जा रही है।

सवाल यह है कि क्या हमारे देश में कपास की कमी पैदा हो गई है? इसका स्पष्ट जवाब है : नहीं, क्योंकि कपास उद्योग के प्रतिनिधियों ने खुद सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि घरेलू स्तर पर कपास की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। कपास की बुआई का मौसम भी शुरू हो चुका है, किसान अपनी खेती-किसानी में निवेश भी कर चुके हैं और कपास की नई फसल अक्टूबर-दिसंबर तक बाजार में आ भी जाएगी। तो फिर कपास आयात के लिए मोदी सरकार देश के दरवाजे क्यों खोल रही है?

इस प्रश्न का उत्तर अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में खोजा जा सकता है, जिसका मुख्य लब्बोलुआब यह है कि भारत को अमेरिका से हर साल 100 अरब डॉलर का सामान खरीदना ही पड़ेगा, चाहे उसे जरूरत हो या न हो और वह भी बिना किसी टैरिफ (शुल्क) के। पिछले सीजन में भी अगस्त-दिसंबर के बीच कपास आयात को शुल्क मुक्त किया गया था और 18 लाख गांठों का आयात किया गया था, जबकि इसके पूर्व के वर्ष में इसी अवधि के दौरान 8.8 लाख गांठों का सशुल्क आयात किया गया था। अमेरिकी के साथ व्यापार समझौते का प्रणाम यह है कि आयातित गांठों को मात्रा जून अक्टूबर के पांच महीनों की अवधि में 40 लाख गांठ पहुंचने वाली है, जबकि भारत का सालाना कपास आयात अभी तक 40-50 लाख गांठों का ही रहा है। इसका सीधा सा अर्थ है कि भारतीय किसानों की कीमत पर अब कपास का आयात दो से ढाई गुना बढ़ना अनुमानित है।

इतने बड़े पैमाने पर और जरूरत से बाहर जाकर कपास आयात का भारतीय किसानों पर नकारात्मक असर पड़ना तय है। अगले पांच महीनों के लिए आयात शुल्क शून्य किए जाने का बाजार पर सीधा असर तो यह पड़ा है कि कपास की कीमतें 3% गिर गई है। कपास का औसत न्यूनतम समर्थन मूल्य (मध्यम रेशे और लंबे रेशे के मूल्य का औसत) लगभग 8500 रूपये प्रति क्विंटल है। लेकिन खुले बाजार में उसे औसतन 6800 रूपये क्विंटल ही मिलता है। शुल्क मुक्त आयात की घोषणा के बाद इसकी कीमत गिरकर 6600 रूपये प्रति क्विंटल से भी नीचे चली गई है। अमेरिकी उत्पादों के भारतीय बाजार में पटने के साथ यह गिरावट और तेज हो जाएगी।

एक ओर कृषि इनपुट -- बीज, खाद, कीटनाशक, बिजली, डीजल, पानी -- आदि की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और दूसरी ओर लाभकारी समर्थन मूल्य से भी वंचित कपास के भाव तेजी से गिरेंगे। भारतीय किसान इस झटके को सहन करने की स्थिति में नहीं है। कपास की खेती का घाटा और बढ़ेगा, किसान और ज्यादा ऋणग्रस्त होंगे और उनमें अपने सम्मान की रक्षा के लिए आत्महत्या की प्रवृत्ति और ज्यादा बढ़ेगी, खासकर विदर्भ जैसे क्षेत्रों में, जहां की मुख्य फसल कपास ही है।

हमारे देश में 'कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया' (सीसीआई) केंद्र सरकार द्वारा घोषित (अलाभकारी) समर्थन मूल्य पर किसानों का कपास खरीदता है। अगर आयात के कारण कीमतें गिरती हैं, तो सीसीआई को कम दरों पर बाजार में कपास बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और वह घाटे में जाएगा। इसका सीधा असर किसानों से समर्थन मूल्य पर कपास खरीदी की उसकी क्षमता पर पड़ेगा। इससे सीसीआई तो बर्बाद होगी ही, कपास उत्पादक किसानों की, जिनमें से अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं, समर्थन मूल्य से वंचना और बढ़ जाएगी। सीसीआई के कमजोर पड़ने के साथ ही कपास किसानों के लिए समर्थन मूल्य की प्रणाली भी खतरे में पड़ जाएगी। कपास के मामले में समर्थन मूल्य की व्यवस्था के ध्वस्त होने का सीधा अर्थ है, कपास उत्पादन में आत्मनिर्भरता को खोना और भारत के एक कपास-आयातक देश में बदलना।

कपास उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन' चला रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2025 के बजट में इसका ऐलान किया था। यह मिशन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय मिलकर लागू करेंगे। इस मिशन के तहत अगले पांच सालों में 5,659 करोड़ रूपये से ज्यादा खर्च करने की घोषणा की गई है। इस मिशन के तहत यह घोषणा की गई है कि कपास का उत्पादन बढ़ाने के लिए जलवायु अनुकूल और कीट प्रतिरोधी बीज विकसित किए जाएंगे, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, मंडियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा और ई-प्लेटफॉर्म विकसित करके किसानों को सीधे बाजार तक पहुंचाया जाएगा, आदि-इत्यादि। इस मिशन का भी वही हाल होने जा रहा है, जो किसानों के लिए बनाई गई अन्य योजनाओं का हो रहा है, क्योंकि सी-2+50 प्रतिशत फार्मूले के आधार पर कपास किसानों को लाभकारी समर्थन मूल्य देना सुनिश्चित करने की बात इस मिशन में सिरे से गायब है। अब सोचने की बात यही है कि किसानों को लाभकारी समर्थन मूल्य दिए बिना और कपास की शुल्क मुक्त आयात की इजाजत देकर देश में किस प्रकार कपास उत्पादन बढ़ाया जा सकता है? साफ है कि पूरा मिशन कपास किसानों और किसान आंदोलन की आंखों में धूल झोंकने के लिए ही बनाई गई है।

भारत में कपास उत्पादक किसानों की बर्बादी किसकी कीमत पर हो रही है? इसका फायदा निश्चित ही उन कपास कारोबारियों को होने जा रहा है, जिनकी पिछले पांच वर्षों में मुनाफे की औसत वृद्धि दर 22-23 प्रतिशत रही है। पिछले 5 सालों में कपास (कपास/रुई) के कारोबारियों और मिलों का शुद्ध मुनाफा 9 से 38 के बीच रहा है। शून्य आयात शुल्क पर कपास आयात करने से उनके मुनाफे और बढ़ेंगे। भारत को कपास निर्यात करने वाले देशों में अमेरिका का स्थान दूसरा है, अब वह पहले स्थान पर आएगा। इससे उन बड़े अमेरिकी किसानों को (अमेरिका में छोटे और सीमांत किसान नहीं है), जिन्हें उनकी सरकार से भारी अनुदान मिलता है, भारत के बाजार में कब्जा करने का मौका मिलेगा, जो अपने माल को खपाने के लिए पूरी दुनिया की खाक छान रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एक अमेरिकी किसान को जहां औसतन सालाना 25 लाख रूपये से ज्यादा की प्रत्यक्ष सब्सिडी मिलती है और फसल खर होने या कीमतों में गिरावट होने पर भी उन्हें कभी घाटा नहीं होता, वहीं एक भारतीय किसान को सालाना औसतन केवल 6000 रूपये की ही सब्सिडी मिलती है और फसल खराब होने या भावों में उतार चढ़ाव का पूरा बोझ उन्हें ही उठाना पड़ता है। इसलिए विश्व बाजार में अमेरिकी कपास भारत के कपास से हमेशा सस्ता होता है। इसलिए भारत के कपास कारोबारी भारतीय किसानों का कपास खरीदने के बजाए अमेरिका का सस्ता कपास खरीदेंगे और अपने मुनाफे को बढ़ाएंगे। भारतीय किसान की बर्बादी की नींव पर अमेरिकी किसानों को खुशहाल बनाया जाएगा और भारत के कॉरपोरेट कपास व्यापारियों के मुनाफे खड़े किए जायेंगे।

भाजपा-आरएसएस की मोदी सरकार ठीक यही चाहती है। भारतीय किसानों की सुरक्षा और राष्ट्रीय कृषि की ज़रूरतें उसकी प्राथमिकता में नहीं है। यही कारण है कि वह वैश्विक और साम्राज्यवादी आर्थिक दबावों के आगे बेशर्मी से घुटने टेक रही है। मोदी सरकार की इस साम्राज्यवादपरस्त नीतियों के खिलाफ और देश के कृषि क्षेत्र और संप्रभुता को बचाने के लिए किसानों और मजदूरों सहित आम जनता के सभी तबकों को मिलकर संघर्ष करना होगा।

(लेखक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)

विज्ञापन
Advertisement

Live

LIVE

ताज़ा खबरें

Live

CG- किसानों के लिए जरूरी खबर: अब सोसायटियों में नहीं लगानी पड़ेगी लंबी लाइन, घर बैठे मिलेगा टोकन, जानें क्या हैं नियम…..

छत्तीसगढ़ न्यूज़ -‘तुंहर टोकन’ एप से 24 घंटे मिलेगी ऑनलाइन सुविधा घर बैठे मिलेगा ट...

Live

05 वर्षों में 7,395 करोड़ रूपए का प्रावधान, विकसित भारत/2047 के लक्ष्य को मिलेगी गति

मुंगेली न्यूज़ - आत्मनिर्भर पंचायतें, विकसित गांव’ के संकल्प को मिलेगी मजबूती, प्...

Live

कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देश पर खाद्य विभाग एवं मंडी समिति की संयुक्त कार्रवाई, 5 प्रकरण दर्ज

कवर्धा -धान खरीदी से पहले जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 86.40 क्विंटल धान जब्त

Live

कब टूटकर गिर पड़े छत का कमजोर हिस्सा, कोई भरोसा नहीं; हादसे का इंतजार कर रहा शिक्षा विभाग बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे, जिम्मेदारों से तत्काल मरम्मत की मांग

पंडरिया बिझौरी - बिझौरी स्कूल के जर्जर स्कूल पर बड़ा सवाल: छत से झड़ रहा प्लास्ट...

Update

कब टूटकर गिर पड़े छत का कमजोर हिस्सा, कोई भरोसा नहीं; हादसे का इंतजार कर रहा शिक्षा विभाग बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे, जिम्मेदारों से तत्काल मरम्मत की मांग

बिझौरी स्कूल के जर्जर स्कूल पर बड़ा सवाल: छत से झड़ रहा प्लास्टर, मासूमों की जिं...

Update

कवर्धा से रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों पर भी इसका असर पड़ेगा। खबर में दिए गए किराया

कवर्धा से रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे शहरों की यात्रा करने वाले...

Live

कवर्धा से रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों पर भी इसका असर पड़ेगा। खबर में दिए गए किराया

छत्तीसगढ़ कवर्धा न्यूज़ -कवर्धा से रायपुर और बिलासपुर जाने वालों को भी देना होगा ज...

श्री दिगवेन्द्र कुमार गुप्ता

श्री दिगवेन्द्र कुमार गुप्ता

प्रधान सम्पादक - श्री दिगवेंद्र कुमार गुप्ता

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

जरूरी खबरें