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देश-एंजियोग्राफी क्या होती है? : एंजियोग्राफी से दिल की नलियों में रुकावट का कैसे पता चलता

Chief Editor-Digvendra Kumar Gupta / Fri, Jun 12, 2026 / Post views : 100

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एंजियोग्राफी से दिल की नलियों में रुकावट का कैसे पता चलता है?

दिल को भी लगातार खून और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। यह काम कोरोनरी आर्टरी यानी दिल की छोटी-छोटी खून की नलियाँ करती हैं। जब इन नलियों की अंदरूनी दीवारों पर चर्बी, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जैसी परतें जमने लगती हैं, तो रास्ता संकरा हो जाता है। इसी जमाव को आम भाषा में ब्लॉकेज/रुकावट कहा जाता है। इससे दिल तक खून कम पहुँचता है और सीने में दर्द, सांस फूलना या हार्ट अटैक जैसी समस्या हो सकती है।

एंजियोग्राफी क्या होती है?

एंजियोग्राफी एक मेडिकल टेस्ट है, जिसमें डॉक्टर दिल की खून की नलियों को एक्स-रे की मदद से देखते हैं। इसमें एक पतली, लचीली नली जिसे कैथेटर कहते हैं, हाथ की कलाई या जांघ की धमनी से अंदर डाली जाती है और धीरे-धीरे दिल की नलियों तक पहुँचाई जाती है।

इसके बाद डॉक्टर इस कैथेटर के माध्यम से एक खास दवा जैसी चीज डालते हैं, जिसे कॉन्ट्रास्ट डाई कहा जाता है। यह डाई एक्स-रे में साफ दिखाई देती है। जब डाई दिल की नलियों में बहती है, तो स्क्रीन पर पूरा रास्ता दिखाई देने लगता है। जहाँ खून का रास्ता सामान्य होता है, वहाँ डाई आसानी से आगे बढ़ती है। जहाँ रास्ता संकरा या बंद होता है, वहाँ डाई का बहाव रुकता, पतला होता या टूटता हुआ दिखाई देता है। इसी से डॉक्टर समझते हैं कि ब्लॉकेज कहाँ है और कितना है।

फोटो के हिसाब से प्रक्रिया को आसान भाषा में समझिए

फोटो में पहले दिल की नलियों को दिखाया गया है। दिल के ऊपर बहुत सारी लाल-नीली नलियाँ होती हैं। ये नलियाँ दिल की मांसपेशियों तक खून पहुँचाती हैं। अगर इनमें कहीं चर्बी या प्लाक जमा हो जाए, तो खून का रास्ता छोटा हो जाता है। यही रुकावट आगे चलकर बड़ी समस्या बना सकती है।

दूसरे हिस्से में दिखाया गया है कि हाथ की नस/धमनी से कैथेटर डाला जाता है। असल में कैथेटर बहुत पतली ट्यूब होती है, जिसे डॉक्टर सावधानी से रक्त-नली के रास्ते दिल तक ले जाते हैं। मरीज को आमतौर पर पूरा बेहोश नहीं किया जाता; अक्सर लोकल एनेस्थीसिया देकर जगह को सुन्न किया जाता है।

तीसरे हिस्से में स्क्रीन पर एक्स-रे जैसा चित्र दिख रहा है। जब कॉन्ट्रास्ट डाई दिल की नलियों में जाती है, तो नलियाँ सफेद या चमकदार रास्ते की तरह दिखती हैं। जहाँ रास्ता साफ है, वहाँ लाइन लगातार और मोटी दिखती है। जहाँ रुकावट है, वहाँ लाइन पतली, टूटी या कम दिखाई देती है। यही देखकर डॉक्टर बताते हैं कि ब्लॉकेज कितने प्रतिशत है।

ब्लॉकेज कितने प्रकार से समझा जाता है?

अगर नली में हल्की संकुचन है, तो डॉक्टर दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव की सलाह दे सकते हैं। अगर रुकावट ज्यादा है, तो आगे एंजियोप्लास्टी या स्टेंट लगाने की जरूरत पड़ सकती है। एंजियोप्लास्टी में संकरी जगह को खोलने की कोशिश की जाती है और कई बार वहाँ स्टेंट लगाया जाता है ताकि नली खुली रहे।

एंजियोग्राफी कब कराई जाती है?

डॉक्टर यह टेस्ट तब सलाह दे सकते हैं जब मरीज को बार-बार सीने में दर्द हो, चलने पर सांस फूलती हो, ECG या TMT जैसी जांचों में शक आए, हार्ट अटैक का खतरा लगे, या पहले से दिल की बीमारी हो। यह फैसला हमेशा डॉक्टर मरीज की हालत, उम्र, रिपोर्ट और लक्षण देखकर लेते हैं।

क्या एंजियोग्राफी से इलाज भी हो जाता है?

एंजियोग्राफी मुख्य रूप से जांच है। इससे पता चलता है कि रुकावट कहाँ और कितनी है। लेकिन कई बार उसी प्रक्रिया के दौरान अगर जरूरत हो और स्थिति ठीक हो, तो डॉक्टर एंजियोप्लास्टी करके स्टेंट भी लगा सकते हैं। यानी पहले जांच होती है, फिर जरूरत के अनुसार इलाज का निर्णय लिया जाता है।

क्या इसमें कोई जोखिम होता है?

एंजियोग्राफी आजकल काफी सामान्य और उपयोगी जांच है, लेकिन किसी भी मेडिकल प्रक्रिया की तरह इसमें थोड़ा जोखिम हो सकता है। जैसे कैथेटर डालने की जगह पर सूजन, खून आना, डाई से एलर्जी, किडनी पर असर, और बहुत दुर्लभ मामलों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है। इसलिए यह जांच हमेशा डॉक्टर की सलाह और अस्पताल की निगरानी में की जाती है।

आसान उदाहरण से समझिए

मान लीजिए एक पानी की पाइप है। अगर पाइप के अंदर मिट्टी या कचरा जमा हो जाए, तो पानी का बहाव कम हो जाएगा। अब अगर उस पाइप में रंगीन पानी छोड़ा जाए, तो जहाँ रंगीन पानी रुक रहा है या कम बह रहा है, वहाँ रुकावट समझ आ जाएगी। एंजियोग्राफी में भी कुछ ऐसा ही होता है। फर्क बस इतना है कि यहाँ पाइप की जगह दिल की नलियाँ होती हैं और रंगीन पानी की जगह कॉन्ट्रास्ट डाई होती है।

ध्यान रखने वाली बात

सीने में तेज दर्द, बाएं हाथ/जबड़े में दर्द, बहुत ज्यादा पसीना, घबराहट, सांस फूलना या बेहोशी जैसे लक्षण हों तो इसे सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी सेवा से संपर्क करना चाहिए।

निष्कर्ष:

एंजियोग्राफी दिल की नलियों का “लाइव रोडमैप” दिखाने वाली जांच है। इसमें कैथेटर और कॉन्ट्रास्ट डाई की मदद से डॉक्टर देखते हैं कि खून का रास्ता कहाँ साफ है और कहाँ संकरा या बंद हो रहा है। इसी जांच से दिल की नलियों में रुकावट का सही स्थान और गंभीरता समझ में आती है।

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